इतनी चोटें लगी मौहाबत में
कि घायल हो गए

और डर गए जमाने से
कायर हो गए

जब कुछ भी न कर सके तो
उठा ली हमने कलम

फिर ऐसे ही धीरे धीरे
हम शायर हो गए

....... मिलाप सिंह भरमौरी