इस बार की पतझड बड़ी लम्बी हैं
ऋतुएँ भी बदली, मौसम भी पलटा
पक्षी भी चिलाएं, तितलियाँ भी सुनायें
सूरज लगा बतियाने धरती से
आती हैं हमेशा अपनी मर्ज़ी से
इस बार क्या हुआ
चाँद भी लगा पूछने
सभी को चिंता सी लगती है
इस बार की पतझड बड़ी लम्बी है !


नदियों का बहाव बड़ा तेज है
हवा का भी हल्का जोश हैं
पहाड़ों की बूढ़ी चोटियां भी देने लगी उलाहने
बिना फूलों की डालियां पहुंची मनाने
बरगद ने भी पंचायत बुलाई
कहना लगा नहीं आई तो होंगी रुसवाई
यह बहार तो बड़ी हट्ठी लगती हैं
इस बार की पतझड बड़ी लम्बी हैं................