खुश हैं मुझे वो उदास करके, मसलन मसले सुलझ भी जाते
उसे लगा क्या फायदा हैं बात करके

वह और लोग होंगे जिन्हे मांगने से मिल जाता हैं
हम तो और खाली हों गएँ उससे फरियाद करके

वो सिकंदर भी तो बिना कुछ लिए ही गया था
फिर तुझे क्या मिल गया मुझे बर्बाद करके

मैं मजबूर, बेक़सूर और तुझसे दूर
सकूँ मिल गया तुझे मेरे ऐसे हालात करके

शायद मेरा मरा मंन ज़िंदा हो जाएँ
खुदा देकर उसे सजा देख ले मेरे साथ इन्साफ करके !




काश! सुनाने के लिए कोई कहानी होती
एक राजा की एक रानी होती
तू था तब ठीक था या तू नहीं हैं तब ठीक हैं
अब इस सवाल का जवाब देने मैं परेशानी होती
तन्हाइयों से दोस्ती कर भी ले इसमें क्या हर्ज़ हैं
कोई दुश्मन करे ऐसी दुआ तो ठीक
तेरी ऐसी आरज़ू से बड़ी हैरानी होती
बड़ी देर से दुआ कर रहे हैं
सुनता अगर खुदा इतनी आसानी से
तो ज़िन्दगी बड़ी सुहानी होती !