हे मोहिनी
कामिनी
मायावी
अप्सरा

तेरा रूप
तेरा रंग
तेरा यौवन
सब है खरा

तेरा सुडौल अंग देख
डोलता है मन मेरा

तेरे रमणीय होठ देख
रस के सागर में डूब जाता है मन मेरा

तेरे लंबे काले रेशमी बाल देख
उफान मारता है मन मेरा

तेरे मदमस्त नैन देख
सम्मोहित होता है मन मेरा

तेरी मखमली त्वचा देख
फिसलता है मन मेरा

सुंदरी

तू अनमोल है
अदूष्य है
अतुलनीय है
अद्वितीय है
आराध्य है

तेरे आकर्षण से कामनाएं जगना अपरिहार्य है

मेरी समस्त इन्द्रियों पर पड़ता तेरा ऐसा प्रभाव है
तुझे देखते ही होता उत्तेजनाओं का भराव है

मेरे स्वप्न लोक पर है तेरा एकछत्र राज
अपने प्रेम रस से भर दे मुझे आज

- सौरभ देवानी