बूंदे

आसमान से गीरी हें, कुछ बूंदे आज,
हमने देखा हें, पत्तों से लिपट कर सरकती हुई आज,

ज़मीन से मिलते ही, कुछ घुलती हुई आज,
हमने देखा हें, गीली सी रुह को बेहकाती हुई आज,

बादलो से निकलते ही, कुछ बिखरती हुई आज,
हमने देखा हें, भीगी सी पलको को रूलाती हुई आज,

पत्थरो से टकराते ही, कुछ कहती हुई आज,
हमने देखा हें, फलक से गीरकर मुस्करती हुई आज,

- अमीष