कुछ इस तरह

आज नीले से आसमान पे,
कुछ इस तरह
धुँधला सा नज़र आ रहा हें

जैसे पाक से ईमान पे,
कुछ इस तरह
नकाब सा नज़र आ रहा हें

वैसे तो भूरी सी चादर पे,
कुछ इस तरह
साया सा नज़र आ रहा हें

जैसे काले से पत्थर पे
कुछ इस तरह
खुदा सा नज़र आ रहा हें

- अमीष