तूफानों में घिरा था, खुद ही को भूल चला था |
भंवर में फंसा था |
रास्ता जो मिला, वो भी पत्थरीला था |
वहीँ दूर एक घड़ा था, वो भी प्यासा घड़ा था |
तभी कहीं दूर से एक महक सी आई |
कुछ गुनगुनाने की आवाज़ सी आई |
जब से तुम आई |
नहीं रही मेरे जीवन में तन्हाई |

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