सुबह क्या
शाम क्या
दिन क्या
रात क्या
हर घड़ी
तेरी खैरियत की
फ़रयाद करता हूँ
अपने रब से।

नैन झपकना भूल भी जाऊँ
पर सुमिरन तेरी सलामती की
अपने ईश्वर से

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